सुबह का मॉइस्चराइज़र फेंक दो, सनस्क्रीन लगाओ — इस एक सलाह ने मचा दिया घमासान

बीस साल के एक लड़के की दो-प्रोडक्ट वाली रूटीन पर मिली एक तीखी सलाह ने स्किनकेयर की दुनिया को दो हिस्सों में बाँट दिया है।
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सुबह का मॉइस्चराइज़र फेंक दो, सनस्क्रीन लगाओ — इस एक सलाह ने मचा दिया घमासान · Avonetics

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बात एक ट्रिमर से शुरू हुई और ख़त्म एक ऐसी बहस पर हो रही है जिसमें हर स्किनकेयर लवर की राय है।

बीस साल का एक लड़का दाढ़ी ट्रिम करता है और आईने में उसे वो चेहरा दिखता है जो महीनों से बालों के नीचे छुपा था। जबड़े, ठुड्डी और गालों के नीचे दानों की कतारें, बीच-बीच में पुराने काले निशान।

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उसकी कहानी नई नहीं है। एक्ने उसके साथ आता-जाता रहा है। लेकिन डॉक्टर तक वो एक्ने की वजह से नहीं पहुँचा था — वो कीलॉइड की वजह से गया था, वो उभरे हुए निशान जो उसकी त्वचा हर छोटी चोट पर बना देती है।

डर्मेटोलॉजिस्ट ने मुख्य रूप से कीलॉइड के लिए आइसोट्रेटिनोइन दी और साथ में बेहद सादी रूटीन — सुबह एक हल्का मॉइस्चराइज़िंग जेल, रात में एक हाइड्रेटिंग क्रीम।

नतीजा अच्छा था। कुछ हफ़्तों में लाली घटी और नए दाने कम निकले।

फिर सब रुक गया। त्वचा ठीक दिखी तो दवा छूटी, क्रीम छूटी और डॉक्टर से संपर्क भी टूट गया। कुछ महीने बाद समस्या लौट आई, और इस बार ज़्यादा ज़िद के साथ।

आज उसकी हालत ये है कि प्रोडक्ट कभी-कभार लगते हैं और रात वाली क्रीम उसने ख़ुद बदल ली है — सिर्फ़ इसलिए कि नए प्रोडक्ट के नाम में एक्ने लिखा था।

जब उसने बिना फ़िल्टर की तस्वीरों के साथ मदद माँगी, तो जो सलाह सबसे ऊपर चढ़ी वो छोटी थी पर बम की तरह फटी।

एक कमेंट करने वाले ने कहा कि एक्ने के लिए सैलिसिलिक एसिड या बेंज़ॉयल परॉक्साइड आज़माओ — और सुबह मॉइस्चराइज़र की जगह सनस्क्रीन को अपना डेटाइम स्टेप बना लो।

यही दूसरी लाइन असली चिंगारी बनी। एक पूरा खेमा इसके पीछे खड़ा हो गया, ये कहते हुए कि उसकी रूटीन में इलाज नाम की चीज़ है ही नहीं — सुबह नमी, रात में नमी, और बस।

एक ने तर्क दिया कि दाग और कीलॉइड वाली त्वचा पर धूप सबसे बड़ी दुश्मन है, इसलिए सनस्क्रीन कोई ऐक्स्ट्रा स्टेप नहीं, इलाज का हिस्सा है।

दूसरी तरफ़ का खेमा उतनी ही तेज़ी से पलटा। उनका कहना है कि सलाह ग़लत नहीं है, पर क्रम ग़लत है।

एक ने साफ़ लिखा कि जिस इंसान का इलाज काम कर रहा था और जिसने ख़ुद उसे छोड़ा, उसका पहला कदम नई शीशी नहीं, पुराने डॉक्टर की फ़ाइल होनी चाहिए।

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दूसरे ने चेताया कि कीलॉइड बनाने वाली त्वचा पर तेज़ एक्टिव्स की जलन उल्टी पड़ सकती है, क्योंकि यहाँ हर सूजन नए उभरे निशान में बदल सकती है।

इसी खेमे ने एक और बात उठाई जिसे ज़्यादातर लोग नज़रअंदाज़ कर गए — ट्रिमर। बार-बार ट्रिमिंग और शेविंग की रगड़ अपने आप में दानों को भड़का सकती है।

मज़ेदार बात ये है कि लड़ाई के बीच दोनों खेमे एक जगह चुपचाप हाथ मिला लेते हैं। सनस्क्रीन पर किसी को एतराज़ नहीं।

असली सवाल भरोसे का है — क्या एक जवान लड़का अपनी रूटीन ख़ुद डिज़ाइन कर सकता है, या उसे उसी दरवाज़े पर लौटना चाहिए जहाँ से सुधार शुरू हुआ था?

इसी बहस का उल्टा चेहरा दूसरी कहानी में मिलता है। वहाँ शेल्फ़ भरी नहीं, बिल्कुल ख़ाली है।

एक लड़की का माथा सालों से नहीं मानता — छोटे बंद दाने और कभी-कभार हल्की सूजन, जबकि बाक़ी पूरा चेहरा एकदम साफ़।

ये सिलसिला पंद्रह-सोलह की उम्र में हार्मोनल बर्थ कंट्रोल छोड़ने के बाद शुरू हुआ और दो साल पहले एक बड़े हादसे व सी-पीटीएसडी के बाद और बिगड़ा।

पेट की तकलीफ़ महीनों के प्रोबायोटिक्स से ठीक हो गई, पर दाने नहीं गए। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू से फंगल एक्ने की जाँच की — कोई फ़र्क़ नहीं। दो हफ़्ते बीएचए लगाया — कोई सुधार नहीं। डेयरी छोड़ी — चिकनाहट थोड़ी कम, दाने वहीं।

खुजली नहीं होती, और भड़कन सबसे ज़्यादा पीरियड से पहले वाले दिनों में होती है। फ़िलहाल वो कोई स्किनकेयर इस्तेमाल ही नहीं करती।

एक चेहरा इलाज छोड़ने से बिगड़ा, दूसरा इलाज कभी ठीक से शुरू न कर पाने से अटका है — और दोनों पर रूप रंग के होस्ट आमने-सामने बैठकर आख़िर में एक साफ़ फ़ैसला सुनाते हैं, सिर्फ़ शो पर।

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