दादा-दादी की वसीयत में लिखा था पोते का खौफनाक सच: देहांत से ठीक पहले खुला वो राज़ जिसने परिवार के उड़ा दिए होश!

सगे भाई की जलन और झूठ की साज़िश का ऐसे हुआ पर्दाफाश, आखिरी सांसों से पहले बुजुर्गों ने सुनाया अपना अंतिम फैसला।
Hindi

दादा-दादी की वसीयत में लिखा था पोते का खौफनाक सच: देहांत से ठीक पहले खुला वो राज़ जिसने परिवार के उड़ा दिए होश! · Avonetics

🎧 Podcast episode
Coming soon — आदित्य & नेहा are taking this one into the studio.
Sponsored
Volicci custom graphic tees, hoodies & die-cut stickers, a fresh original design every day. Learn more →

पारिवारिक रिश्तों में जब जलन और साज़िश का ज़हर घुल जाता है, तो तबाही का मंज़र बहुत भयानक होता है। एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ एक बड़े भाई ने अपने ही छोटे भाई का जीवन बर्बाद करने के लिए झूठ का जाल बुना। बचपन में उग्र और नादान रहा छोटा भाई जब बड़ा होकर संभल गया और अपनी ज़िंदगी संवार ली, तो बड़े भाई को अपनी 'आदर्श बेटे' की छवि खतरे में दिखती नज़र आई। इसके बाद शुरू हुआ झूठी अफ़वाहों और साज़िशों का दौर।

बड़े भाई ने अपने ही दादा-दादी के कान भरने शुरू कर दिए कि उसका छोटा भाई रिश्तेदारों में उनके खिलाफ अनर्गल बातें कह रहा है। बुजुर्ग दादा-दादी ने अपने ही पोते से दूरी बना ली। लेकिन सच को ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता था। जब पीड़ित पोते को इस बात का अहसास हुआ, तो उसने अपने पिता की मौजूदगी में दादा-दादी के सामने ऐसे डिजिटल सबूत और मैसेजेस रख दिए, जिसने बड़े भाई के सफेद झूठ का नकाब पूरी तरह उतार दिया।

Read nextमेरी माँ ने कहा 'मैं सबसे थक गई हूँ' लेकिन फिर मेरे नए घर में रहना चाहती है!

सच्चाई सामने आने के बाद जब दादा-दादी ने बड़े पोते से जवाब-तलब किया, तो उसने बाहर सुधरने का नाटक किया लेकिन पीठ पीछे अपने छोटे भाई को फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दीं। जब दादा-दादी को इस बात का पता चला, तो उनका दिल पूरी तरह टूट गया। अपने जीवन की अंतिम घड़ियों में उन्होंने यह स्वीकार किया कि वे अपने बड़े पोते की इस हरकत से बेहद निराश हैं। इसके कुछ ही समय बाद दोनों का देहांत हो गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जनता के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। एक टिप्पणीकार ने कहा कि बड़ा भाई एक असुरक्षित और चालाक इंसान है, जो दूसरे को नीचा दिखाकर अपनी झूठी साख बचाना चाहता था। वहीं दूसरे व्यक्ति का तर्क था कि छोटे भाई को यह राज़ कभी भी उस झूठे भाई को नहीं बताना चाहिए, क्योंकि ऐसे सोशियोपैथ इंसान से दूरी बनाना ही अकलमंदी है। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भाई को यह सच बताकर उसका घमंड तोड़ा जाना चाहिए।

Your brand, right here.Reach story-obsessed listeners in 45+ languages → advertise on Avonetics

इसी से मिलता-जुलता एक और मामला बाज़ार में देखने को मिला जहाँ एक 14 साल के मेहनती बच्चे से एक महिला ने उसकी $15 की मेहनत मुफ़्त में हथियाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने डटकर मुकाबला किया। इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि हक और सच की लड़ाई में चुप रहना हमेशा सही नहीं होता।

क्या छोटे भाई को दादा-दादी की अंतिम निराशा का सच उस साज़िशी भाई के मुंह पर मारना चाहिए? इस गरमा-गरम नैतिक दुविधा पर 'कटघरा' के पोडकास्ट में आदित्य और नेहा की तीखी बहस ज़रूर सुनें।

0:00
0:00
Link copied ✓