रिक्रूटर की गोस्टिंग से लेकर नाइट शिफ्ट का डिप्रेशन: कॉरपोरेट में फंसती युवाओं की जिंदगी

जब एक पूर्व रिक्रूटर को ही मिला अपनी बिरादरी का धोखा, और नाइट शिफ्ट मैकेनिक ने आज़ादी के लिए सोचा सस्पेंशन का रास्ता।
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रिक्रूटर की गोस्टिंग से लेकर नाइट शिफ्ट का डिप्रेशन: कॉरपोरेट में फंसती युवाओं की जिंदगी · Avonetics

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कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले कर्मचारियों का गुस्सा इन दिनों चरम पर है। हाल ही में दो ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने एचआर और कॉरपोरेट वर्किंग कल्चर की पोल खोलकर रख दी है। पहला मामला एक ऐसे सेल्स पेशेवर का है जो खुद सालों तक रिक्रूटर रह चुका है। उसका कहना है कि जब उसने क्षेत्र बदला, तब उसे अहसास हुआ कि उम्मीदवार रिक्रूटर्स से इतनी नफरत क्यों करते हैं।

पीड़ित कर्मचारी के अनुसार, फाइनल राउंड और ऑन-साइट इंटरव्यू देने के बाद भी उसे कंपनी द्वारा पूरी तरह गोस्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं, अवॉर्ड जीत चुके रिक्रूटर्स फोन पर बात करने से बचते हैं और पार्किंग या कंपनी बेनिफिट्स जैसे साधारण सवालों के जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझते। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक अनुभवी पेशेवर ने कहा कि आजकल का जॉब मार्केट पूरी तरह खरीदारों के पक्ष में है, इसलिए रिक्रूटर्स उम्मीदवारों के साथ रुखा व्यवहार कर रहे हैं, लेकिन वक्त बदलते देर नहीं लगती।

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वहीं दूसरी तरफ, कॉरपोरेट की नाइट शिफ्ट में काम करने वाले एक मेंटेनेंस मैकेनिक की दास्तान भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। रात 11 बजे से सुबह 7:30 बजे की शिफ्ट में काम करते हुए मैकेनिक का मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ चुका है। दिन की शिफ्ट का मैनेजर इतना टॉक्सिक और सनकी है कि शिफ्ट बदलना नामुमकिन हो गया है।

इस घुटन से निकलने के लिए मैकेनिक को 'रेफ्रिजरेशन इंजीनियर' का लाइसेंस चाहिए, लेकिन उसकी परीक्षा सिर्फ सुबह के समय होती है। कोई रास्ता न दिखने पर मैकेनिक अब खुद को जानबूझकर सस्पेंड करवाने की सोच रहा है ताकि उसे पढ़ाई का वक्त मिल सके। एक अन्य टिप्पणीकार ने इस पर सलाह देते हुए कहा कि जानबूझकर सस्पेंड होना करियर के रिकॉर्ड पर काला धब्बा लगा सकता है, इसलिए मेडिकल लीव या रिजाइन करना ज्यादा समझदारी होगी।

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ये दोनों कहानियाँ साबित करती हैं कि कॉरपोरेट की चकाचौंध के पीछे भारी अव्यवस्था और मानसिक तनाव छिपा हुआ है।

क्या रिक्रूटर्स का यह रवैया आलस है या काम का बोझ? और क्या नाइट शिफ्ट से भागने के लिए सस्पेंशन सही रास्ता है? हमारे होस्ट्स रिया और रोहित 'बॉसगिरी' पॉडकास्ट के नए एपिसोड में इस पर खुलकर बहस कर रहे हैं।

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