99% मूक फ़िल्में राख में तब्दील! जानिए कैसे कबाड़ियों ने बेच दिया भारत के सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास

भारत की पहली बोलती फ़िल्म 'आलम आरा' की एक भी रील आज दुनिया में मौजूद नहीं है — कहाँ गायब हुआ हमारा सिनेमा?
Hindi

99% मूक फ़िल्में राख में तब्दील! जानिए कैसे कबाड़ियों ने बेच दिया भारत के सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास · Avonetics

🎧 Podcast episode
Coming soon — अमित & आरती are taking this one into the studio.
SponsoredAs an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. BISSELL Little Green Max Pet Portable EVERY PURCHASE SAVES PETS. BISSELL proudly supports BISSELL Pet Foundation and its mission to help save homeless pets.. SUPERIOR SUCTION. 30% more powerful than the competitive por… See it →

यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि भारतीय सिनेमा के पहले दो दशकों का इतिहास लगभग पूरी तरह मिट चुका है। 1913 से 1931 के बीच बनी 1300 से अधिक मूक फ़िल्मों में से आज हमारे पास 35 फ़िल्में भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

सिनेमा इतिहासकारों का कहना है कि उस दौर में फ़िल्में 'सेल्युलोइड नाइट्रेट' पर बनती थीं। यह केमिकल इतना खतरनाक होता था कि ज़रा सी गर्मी पाते ही इसमें अपने आप आग लग जाती थी। बॉम्बे के कई बड़े स्टूडियो के गोदामों में लगी आग ने हज़ारों रीलों को मिनटों में भस्म कर दिया।

Read nextताइशो लोकतंत्र: क्या जापान का सुनहरा 'लोकतांत्रिक' दौर असल में सिर्फ एक दिखावा था?

लेकिन आग से भी बड़ा दुश्मन बनी हमारी अपनी उपेक्षा। जब 1931 में बोलती फ़िल्में आईं, तो मूक फ़िल्मों को बेकार समझ लिया गया। निर्माताओं ने इन अमूल्य रीलों को कबाड़ियों को किलो के भाव बेच दिया, जिन्होंने रीलों को पिघलाकर उनसे चांदी निकाली या प्लास्टिक का सामान बनाया।

हद तो तब हो गई जब भारत की पहली बोलती फ़िल्म 'आलम आरा' (1931) का भी यही हश्र हुआ। राष्ट्रीय फ़िल्म संग्रहालय जब तक हरकत में आता, तब तक 'आलम आरा' की आखिरी बची रील भी कबाड़ में बिक चुकी थी। यहाँ तक कि दादा साहेब फाल्के की 'राजा हरिश्चंद्र' का भी केवल आधा हिस्सा ही आज बच पाया है।

SponsoredAs an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. Supergoop! Unseen Sunscreen 100% INVISIBLE SUNSCREEN – Unseen Sunscreen SPF 50 is an iconic, weightless, scentless sunscreen that delivers broad spectrum protection with a completely clear finish.. MAKEUP-GRI… See it →

एक पुराने आर्काइविस्ट ने दर्द साझा करते हुए लिखा था कि हमने अपने इतिहास को खुद अपने हाथों से जला दिया। जो विरासत दुनिया भर के संग्रहालयों में होनी चाहिए थी, वह चूड़ियों के कारखानों में पिघल गई।

क्या यह सिर्फ़ एक लापरवाही थी या फिर भारतीय सिनेमा के साथ हुआ सबसे बड़ा सांस्कृतिक अपराध? 'सिल्वर स्क्रीन' के आज के एपिसोड में हमारे होस्ट्स इसी दर्दनाक और अनसुलझी कहानी का विश्लेषण कर रहे हैं।

SponsoredAs an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. Scott Professional Multifold Paper Towels Bulk Case: 250 Sheets/Pack; 16 Packs of Scott Universal Multifold Paper Towels/Case; 4,000 Sheets/Case; Absorbency Pockets; 9.2" x 9.4" sheets; Standard Tier; White;. Standard Tier… See it →
0:00
0:00
Link copied ✓