3000 साल पुराने अंधविश्वास से खुली AI की पोल: डेवलपर ने बनाया ऐसा एजेंट जिसने उड़ाए सबके होश!

जब प्राचीन मेसोपोटेमिया के शकुन-शास्त्र को AI से जोड़ा गया, तो सामने आई एजेंटिक सिस्टम की वो कड़वी हकीकत जो टेक कंपनियां छिपा रही थीं।
Hindi

3000 साल पुराने अंधविश्वास से खुली AI की पोल: डेवलपर ने बनाया ऐसा एजेंट जिसने उड़ाए सबके होश! · Avonetics

🎧 Listen to this episode
Plays on Spotify · Open on Spotify ↗
Sponsored
Volicci custom graphic tees, hoodies & die-cut stickers, a fresh original design every day. Learn more →

आजकल टेक दुनिया में हर कोई 'एजेंटिक एआई' की माला जप रहा है। दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में कंपनियों के एडमिनिस्ट्रेशन से लेकर भर्ती और कस्टमर केयर तक का काम एआई एजेंट्स ही संभालेंगे। लेकिन क्या ये एआई एजेंट्स सचमुच इतने काबिल हैं? एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने इस बात का जवाब खोजने के लिए 3000 साल पुरानी मेसोपोटेमिया सभ्यता के शकुन-शास्त्र का सहारा लिया और जो सच सामने आया, उसने एआई के हाइप की धज्जियाँ उड़ा दीं।

शोधकर्ता ने 'हाउस ऑफ आईएफ्स' नामक एक अनूठा प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट तैयार किया। मेसोपोटेमिया के प्राचीन लोग मानते थे कि अगर कोई अजीब संकेत दिखता है, तो उसका कोई निश्चित परिणाम होगा। इसी 'इफ-देन' (IF-THEN) लॉजिक पर एआई एजेंट को सेट किया गया। यह एआई रोज की ख़बरों को पढ़ता है और उन्हें इतिहास के पुराने पैटर्नों से जोड़कर एक नया शकुन या अपशकुन गढ़ता है। इसमें आधुनिक तकनीक जैसे आरएजी (RAG) और मेमोरी लूप्स का इस्तेमाल किया गया था।

Read nextलेनोवो योगा 9n: RTX स्पार्क का दावा, पर कीमत गायब! क्या है इस 'पहले' लैपटॉप का सच?

लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब सिस्टम की सटीकता की जाँच की गई। सटीक और आधिकारिक दस्तावेज़ देने के बावजूद, एआई चैटबॉट अपनी तरफ से बातें जोड़ने, अंदाज़े लगाने और मनगढ़ंत जवाब तैयार करने से बाज़ नहीं आया। शोधकर्ता ने पाया कि एआई किसी भी बेतुके पैटर्न को इतनी सफाई से पेश करता है कि सुनने वाले को वह पूरी तरह सच लगने लगता है।

इस प्रयोग ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक वर्ग का कहना है कि यह प्रयोग उन लोगों के मुँह पर तमाचा है जो दावा करते हैं कि एआई इंसानों की नौकरियाँ छीन लेगा। एक टिप्पणीकार ने कहा कि एआई का यह हैलुसिनेशन यानी मनगढ़ंत बातें गढ़ना ही इसका सबसे बड़ा खतरा है, जिसके बारे में कोई टेक कंपनी बात नहीं करना चाहती।

Your brand, right here.Reach story-obsessed listeners in 45+ languages → advertise on Avonetics

वहीं दूसरी तरफ, कुछ टेक लवर्स इसे सीखने का बेहतरीन तरीका मान रहे हैं। एक अन्य आलोचक ने कहा कि बोरिंग और उबाऊ ऐप बनाने के बजाय प्राचीन शकुन-शास्त्र के ज़रिए एआई एजेंट्स की सीमाओं को समझना एक मास्टरस्ट्रोक है। एआई गलतियाँ कर रहा है, लेकिन इससे हमें यह समझ आ रहा है कि तकनीक को कहाँ सुधारना है।

क्या एआई वाकई सिर्फ एक बहरूपिया है जो झूठ को सच बनाकर बेचता है? हमारे होस्ट्स सचिन और दीप्ति ने 'फुल चार्ज' के ताज़ा एपिसोड में इस पूरे मामले की परतें उघेड़ी हैं।

0:00
0:00
Link copied ✓