आकाश की ओर उठती दृष्टि: बेंजामिन वो की पावन यादें, विश्वास और ल्यूकेमिया के साए में सांत्वना की खोज

15 वर्ष के एक अद्भुत बालक की कहानी, जिसने हवाई जहाजों और कोडिंग से प्यार किया और संत कार्लो एकुटिस के साथ स्वर्गीय मित्रता पाई।
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सत्रहवीं शताब्दी के साइबेरियाई गांव मर्कुशिनो में संत सिमियोन नाम के एक साधारण दर्जी रहते थे। वे चुपचाप अपना काम करते, लोगों के कोट सीते, और बिना किसी दिखावे के अपनी प्रार्थनाओं में लीन रहते। जब उनका निधन हुआ, तो कोई उनका नाम तक याद न रख सका। लेकिन दशकों बाद, जब उनकी पावन देह भूमि से अपरिवर्तित रूप में प्रकट हुई, तो हजारों लोगों को वहां से आत्मिक और शारीरिक चंगाई मिली। आज जब हम इस इतिहास और आज के पवित्र मास पाठों पर ध्यान देते हैं, तो हमारी नजर बेंजामिन वो (Benjamin Vo) के सुंदर और पवित्र जीवन पर टिक जाती है। बेन एक ऐसा बालक था जो हमेशा ऊपर देखना पसंद करता था। उसे आसमान में उड़ते बोइंग 737 विमानों की गतिशीलता, बादलों के बनने की कला और कंप्यूटर कोड्स की संरचना से गहरा लगाव था। केवल 15 वर्ष की आयु में, जब ल्यूकेमिया जैसी कठिन बीमारी ने उसके जीवन को घेरा, तब भी उसकी मुस्कान और उसका कैथोलिक विश्वास कभी डगमगाया नहीं। बहुत से लोग अक्सर सोचते हैं कि जब कोई बच्चा बीमार होता है, तो शायद परिवार से कोई चूक हुई होगी। लेकिन कैथोलिक विश्वास हमें सिखाता है कि बीमारी न तो माता-पिता की किसी गलती का परिणाम है और न ही ईश्वर की कोई सजा। जीवन में कुछ रास्ते इतने कठिन होते हैं कि उनका कोई सीधा जवाब नहीं होता। ऐसे समय में चुप रहने के बजाय, ल्यूकेमिया जैसी बीमारी का नाम साहस से लेना और ईश्वर के क्रूस की ओर देखना ही चंगाई की शुरुआत है। बेन का जीवन खुशियों से भरा हुआ था। नवंबर 2020 की एक धूप भरी दोपहर में, बेन अपने भाई के साथ पार्क में खड़ा था, और अपने नीले खिलौने वाले ग्लाइडर को हवा में ऊंचा उठाए हुए मुस्कुरा रहा था। डिज़नीलैंड के स्प्लैश माउंटेन पर पानी की बौछारों के बीच उसकी खिलखिलाहट हो, या शंघाई की रातों में परिवार के साथ बिताए सुनहरे पल—बेन ने हर क्षण को प्रेम से जिया। आज बेन को संत कार्लो एकुटिस के साथ एक अनूठे बंधन में देखा जाता है। कार्लो, जो इटली के एक 15 वर्षीय बालक थे और जिन्हें 2025 में संत घोषित किया गया, वे भी ल्यूकेमिया के कारण ही इतनी कम उम्र में प्रभु के पास चले गए थे। दोनों डिजिटल युग के युवा थे, दोनों ने अपनी प्रतिभा से दूसरों के लिए कुछ बनाया, और दोनों आज स्वर्ग के बगीचे में एक साथ चलते हैं। एक टिप्पणीकार ने कहा कि जब घर की खाली कुर्सी और सन्नाटा दिल को तोड़ने लगे, तो इंसान का नीचे झुकना स्वाभाविक है। लेकिन दूसरे विचारक ने कहा कि मूसा के तांबे के सांप की तरह, जब हम क्रूस पर उठाए गए यीशु को देखते हैं, तो हमें मृत्यु से परे जीवन का आश्वासन मिलता है। बेन का भाई, उसके माता-पिता और उससे प्यार करने वाले हर व्यक्ति के लिए उसकी प्रार्थनाएं हमेशा साथ हैं। क्या एक परिवार इस अपार क्षति के बाद भी विश्वास की लौ जलाए रख सकता है? 'Benjamin को याद करते हुए' के आज के एपिसोड में हमारे होस्ट इसी पावन विषय पर गहराई से विचार कर रहे हैं।

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