17 लाख का बजट और टूटना एक महान डायरेक्टर का: जब 1959 में 'कागज़ के फूल' ने बॉलीवुड को हिलाकर रख दिया!

जिस फ़िल्म ने गुरु दत्त को अंदर से तोड़ दिया, वही आगे चलकर दुनिया की महानतम फ़िल्मों की सूची में शामिल हुई।
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17 लाख का बजट और टूटना एक महान डायरेक्टर का: जब 1959 में 'कागज़ के फूल' ने बॉलीवुड को हिलाकर रख दिया! · Avonetics

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1959 का दौर भारतीय सिनेमा के लिए स्वर्णिम माना जाता है, लेकिन उसी साल एक ऐसी घटना घटी जिसने बॉम्बे फ़िल्म इंडस्ट्री की नींव हिला दी। गुरु दत्त की महत्वाकांक्षी फ़िल्म 'कागज़ के फूल' सिनेमाघरों में लगी और कुछ ही दिनों के भीतर खाली कुर्सियों के कारण उतार दी गई।

उस दौर के गवाह रहे एक पुराने वितरक के अनुसार, फ़िल्म का माहौल इतना दर्दनाक और उदास था कि दर्शक पहले हाफ़ में ही थिएटर छोड़कर जाने लगे थे। 17 लाख रुपये के भारी बजट से बनी यह फ़िल्म भारत की पहली सिनेमास्कोप फ़िल्म थी, लेकिन इसकी विफलता ने गुरु दत्त को मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया।

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सिनेमैटोग्राफ़र वी.के. मूर्ति ने इस फ़िल्म में रोशनी और छाया का ऐसा प्रयोग किया था जो उस समय के बॉलीवुड में अकल्पनीय था। 'वक़्त ने किया क्या हसीं सितम' गाने में जो सूरज की किरण का दृश्य है, उसे शीशे के टुकड़े से रिफ़्लेक्ट करके बनाया गया था। लेकिन तकनीक की यह भव्यता भी दर्शकों को आकर्षित करने में नाकाम रही।

फ़िल्म इतिहासकार बताते हैं कि इस विफलता के बाद गुरु दत्त इतने निराश हुए कि उन्होंने फिर कभी किसी फ़िल्म पर बतौर निर्देशक अपना नाम नहीं दिया। उनके निजी जीवन में आई दरार और फ़िल्म की असफलता ने उन्हें एक ऐसे अंधेरे में धकेल दिया जहाँ से वे कभी बाहर नहीं आ सके।

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विडंबना देखिए, 1980 के दशक में जब यह फ़िल्म यूरोप और जापान में दिखाई गई, तो अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों ने इसे भारतीय सिनेमा का मास्टरपीस घोषित कर दिया। ब्रिटिश फ़िल्म इंस्टीट्यूट के सर्वे में इसे दुनिया की बेहतरीन फ़िल्मों में जगह मिली।

हालांकि, दुखद पहलू यह भी है कि इस फ़िल्म के मूल ओरिजिनल नेगेटिव्स सही रखरखाव न होने के कारण हमेशा के लिए नष्ट हो चुके हैं। आज जो संस्करण हमारे पास मौजूद है, वह विदेशी आर्काइव से मिली रीलों का जोड़-तोड़ है।

इस दुखद दास्तान और गायब हुई रीलों के पीछे का पूरा सच क्या है? 'सिल्वर स्क्रीन' के आज के एपिसोड में हमारे होस्ट्स इसी सिनेमाई इतिहास की गहराई में उतर रहे हैं।

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