हजारों की भीड़ में भाषण देना आसान, पर अनजान बंदे से बात करते ही उड़ जाते हैं होश!

हजारों की भीड़ में भाषण देना आसान, पर अनजान बंदे से बात करते ही उड़ जाते हैं होश! · Avonetics
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रंगमंच और सार्वजनिक भाषण की दुनिया में एक बड़ा ही अजीब विरोधाभास देखने को मिलता है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सैकड़ों दर्शकों के सामने बिना किसी हिचकिचाहट के घंटों बोल सकते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें किसी अनजान व्यक्ति से सामान्य बातचीत करनी पड़ती है, उनके पसीने छूट जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहाँ 21 साल के एक कॉलेज छात्र ने अपनी इस अनोखी और परेशान करने वाली समस्या को साझा किया है।
यह छात्र कॉलेज के भाषणों और प्रेजेंटेशन में हमेशा वाहवाही लूटता है। कारण साफ है—वह अपने भाषण का एक-एक शब्द पहले से याद कर लेता है। स्क्रिप्ट उसके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। लेकिन असली मुसीबत तब आती है जब उसे बिना किसी पूर्व तैयारी के किसी नए व्यक्ति से फोन पर बात करनी पड़े या किसी इंटरव्यू का सामना करना पड़े।
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अगर कोई उससे अचानक कोई सवाल पूछ ले, तो उसकी आवाज कांपने लगती है, वह तुतलाने लगता है और उसका पूरा चेहरा लाल हो जाता है। वह चाहता है कि अपने करियर की शुरुआत से पहले वह अपनी इस 'ऑन द स्पॉट' घबराहट को दूर कर सके। इस समस्या के हल के लिए उसने थिएटर और इम्प्रॉव कॉमेडी के जानकारों से सलाह मांगी है।
इस मामले पर लोगों के बीच दो स्पष्ट राय निकलकर सामने आई हैं। एक बड़े वर्ग का मानना है कि इम्प्रॉव कॉमेडी क्लासेस ऐसे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। एक अनुभवी थिएटर कलाकार ने कहा कि इम्प्रॉव का पहला नियम ही यह होता है कि आप स्टेज पर जो भी करेंगे, पूरी क्लास आपकी सराहना करेगी। जब किसी व्यक्ति को यह भरोसा मिल जाता है कि गलती करने पर भी उसका मज़ाक नहीं उड़ाया जाएगा, तो उसके अंदर का डर अपने आप खत्म होने लगता है।
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वहीं दूसरी तरफ, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों का तर्क अलग है। एक अन्य टिप्पणीकार ने कहा कि हर बात के लिए स्क्रिप्ट तैयार करना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति सामाजिक संकेतों को समझ नहीं पाता या उसमें अनिश्चितता का सामना करने की क्षमता नहीं है। उनका मानना है कि यह केवल बोलने का डर नहीं, बल्कि नियंत्रण खोने की मानसिक एंग्जायटी है। ऐसे में सीधे इम्प्रॉव के मंच पर कूदने के बजाय किसी थेरेपिस्ट से सलाह लेना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
क्या बिना स्क्रिप्ट की जिंदगी जीने के लिए इम्प्रॉव कॉमेडी की बेबाकी काम आएगी या थेरेपिस्ट की शांत सलाह? 'ऑन द स्पॉट' के आज के एपिसोड में हमारे होस्ट्स इसी तीखी और मसालेदार बहस में उतरने वाले हैं।