स्टेज पर सुपरस्टार, लेकिन आम बातचीत में बजा ढोल! जानिए इस अजीब बीमारी का सच

स्टेज पर सुपरस्टार, लेकिन आम बातचीत में बजा ढोल! जानिए इस अजीब बीमारी का सच · Avonetics
Men’s Retro Track Jackets
Men’s Retro Track Jackets, Relaxed Fit · Fashion
See it →
सार्वजनिक मंच पर बोलना और किसी अजनबी से सीधे आंखें मिलाकर बात करना—ये दो बिल्कुल अलग बातें हैं। हाल ही में एक 21 वर्षीय छात्र की कहानी ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। यह छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान भाषण देने में बेहद माहिर है और उसकी बोलने की शैली की हर कोई तारीफ करता है। लेकिन इस प्रतिभा के पीछे एक गहरा डर छिपा है।
छात्र का कहना है कि उसकी सफलता का राज़ केवल उसकी याददाश्त है। वह जो भी बोलता है, शब्द-दर-शब्द रट कर बोलता है। लेकिन जब बात रोजमर्रा की जिंदगी की आती है, जहाँ कोई स्क्रिप्ट नहीं होती, वहाँ वह पूरी तरह पंगु महसूस करता है। किसी नए व्यक्ति से मिलना, अचानक आई कॉल का जवाब देना या इंटरव्यू में बैठना उसके लिए किसी सजा से कम नहीं है।
Read nextताइशो लोकतंत्र: क्या जापान का सुनहरा 'लोकतांत्रिक' दौर असल में सिर्फ एक दिखावा था?
जैसे ही कोई उससे कोई अनपेक्षित सवाल पूछता है और उसे ऑन द स्पॉट ला खड़ा करता है, उसकी आवाज कांपने लगती है, वह तुतलाने लगता है और उसका चेहरा लाल हो जाता है। अपने भावी करियर को लेकर चिंतित यह छात्र अब इस डर से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहा है।
इस मुद्दे पर थिएटर विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के बीच तीखी राय देखने को मिल रही है। एक पक्ष का कहना है कि इम्प्रॉव कॉमेडी ऐसे लोगों के लिए सबसे सही जगह है। एक विशेषज्ञ ने टिप्पणी की कि इम्प्रॉव थिएटर आपको बिना किसी डर के तुरंत सोचने और बोलने की आजादी देता है। वहाँ का माहौल इतना सहयोगात्मक होता है कि इंसान अपनी नाकामियों से डरना छोड़ देता है।
Niphean Inflatable Stand Up Paddle Board
Niphean is committed to providing excellent customer service and reliable product quality. Each Niphean product includes a 30-day return policy and comes with a Manufacturer’s Guar…
See it →
दूसरी ओर, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल शर्मीलेपन की नहीं है। एक विश्लेषक ने कहा कि हर बातचीत को पहले से प्लान करना न्यूरोडाइवर्जेंस या गंभीर एंग्जायटी का लक्षण हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को हर स्थिति पर नियंत्रण रखने की आदत होती है। इसलिए बिना किसी मानसिक परामर्श के सीधे इम्प्रॉव क्लास में जाना उसके तनाव को बढ़ा भी सकता है।
क्या बिना स्क्रिप्ट की जिंदगी जीने की कुंजी इम्प्रॉव कॉमेडी के मंच पर मिलेगी या थेरेपी के शांत माहौल में? हमारे शो 'ऑन द स्पॉट' के अगले एपिसोड में इस दिलचस्प विषय पर बेबाक चर्चा होने जा रही है।