माइनस 14 डिग्री में नंगे पैर बर्फ पर दौड़ा पर्वतारोही: सोनमर्ग के वीरान कैंप में मिली खौफनाक डायरी

माइनस 14 डिग्री में नंगे पैर बर्फ पर दौड़ा पर्वतारोही: सोनमर्ग के वीरान कैंप में मिली खौफनाक डायरी · Avonetics
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सोनमर्ग की बर्फीली घाटी में थजवास ग्लेशियर के पास जब खोज दल ने चमकीले पीले रंग के टेंट की चेन खोली, तो वहां मौजूद हर शख्स का खून जम गया। बाहर शून्य से चौदह डिग्री नीचे हड्डियां कंपा देने वाली ठंड थी, लेकिन टेंट के भीतर गर्म स्लीपिंग बैग, भारी विंटर बूट्स और थर्मल जैकेट अपनी जगह पर करीने से रखे हुए थे। उनतीस वर्षीय अनुभवी ट्रैकर कबीर वोहरा का कोई सुराग नहीं था।
कैंपसाइट का दृश्य किसी रहस्यमयी थ्रिलर फिल्म के सेट जैसा लग रहा था। स्टोव पर रखी चाय की केतली आधी भरी थी और बर्नर की गैस बहुत पहले उड़ चुकी थी। कबीर जैसे उच्च प्रशिक्षित पर्वतारोही का बिना जूतों और बिना जैकेट के इस जानलेवा मौसम में बाहर निकलना असंभव माना जाता है, फिर भी बर्फ पर नंगे पैरों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। ये निशान टेंट से लगभग चालीस मीटर दूर एक चट्टानी किनारे तक जाते हैं और फिर अचानक ऐसे खत्म हो जाते हैं जैसे जमीन ने उन्हें निगल लिया हो।
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इस मामले ने इंटरनेट के खोजी हलकों में तब तहलका मचा दिया जब कबीर के डिजिटल ट्रैकर और निजी सामान की फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आई। कबीर के सैटेलाइट डिवाइस से लापता होने वाली रात एक एसओएस अलर्ट भेजा गया था, मगर हैरानी की बात यह है कि ठीक अठारह सेकंड बाद उस कॉल को रद्द कर दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद जीपीएस ने टेंट के चारों ओर लगातार गोल चक्कर काटने की अजीबोगरीब गति दर्ज की, मानो कबीर किसी चीज से बचने के लिए पागलों की तरह भाग रहे थे।
रहस्य की परतें तब और गहरी हो गईं जब टेंट से कबीर की अधजली डायरी बरामद हुई। डायरी के अंतिम छह पन्ने फाड़कर चूल्हे के पास जलाए गए थे। बचे हुए एक टुकड़े पर कांपती लिखावट में एक खौफनाक संदेश दर्ज था, जिसमें बर्फ के नीचे किसी की मौजूदगी और लालटेन बुझाने का जिक्र था। फोरेंसिक जांच ने पुष्टि की कि यह लिखावट कबीर की ही थी, जिससे यह साफ हुआ कि वे अंतिम पलों में भारी दहशत में थे।
इंटरनेट पर इस रहस्य को लेकर कई धड़े आपस में भिड़ रहे हैं। एक टिप्पणीकार ने कहा कि यह भीषण ठंड के कारण होने वाली मनोवैज्ञानिक स्थिति का स्पष्ट उदाहरण है, जहां अत्यधिक हाइपोथर्मिया का शिकार व्यक्ति भ्रम में अपने कपड़े उतार फेंकता है और अजीब हरकतें करने लगता है।
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दूसरी ओर एक अन्य विश्लेषक का तर्क था कि यह कोई मानसिक बीमारी नहीं बल्कि एक सुनियोजित अपराध या संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में किसी तीसरे पक्ष से सामना होने का मामला है। उनका कहना है कि अगर कबीर होश खो चुके थे तो उन्होंने एसओएस सिग्नल को इतनी सटीकता से बंद कैसे किया और केवल उन्हीं छह पन्नों को क्यों जलाया जिनमें आखिरी दिनों का रिकॉर्ड था।
जांच दल ने सैकड़ों फीट गहरी खाइयों, बर्फीली दरारों और गुफाओं में अत्याधुनिक ड्रोन और खोजी कुत्तों के साथ दिन-रात छानबीन की, लेकिन कबीर का एक भी निशान नहीं मिला। खोजी कुत्ते भी बर्फ पर उन आखिरी कदमों के पास पहुंचकर आगे बढ़ने से इनकार करते रहे। यह सवाल आज भी हवा में तैर रहा है कि क्या कबीर ने अपनी मर्जी से यह सब रचा, या फिर उस रात घाटी के अंधेरे में कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना विज्ञान भी नहीं कर पा रहा।
शो 'सुराग' के दोनों होस्ट्स इस खौफनाक घटना के हर विरोधाभासी पहलू और अनसुलझे सुरागों की पड़ताल पॉडकास्ट के इस नए एपिसोड में कर रहे हैं।