५ साल से नमाज़ नहीं, परिवार को धोखा, दुआ में गंदे ख़याल — एक शख़्स का दर्द और ८०० साल पुरानी गूढ़ किताब का रहस्य

ईमान के संकट से जूझते एक अनाम शख़्स की आपबीती और 'शम्स अल-मआरिफ़' के ऐतिहासिक पन्ने — रवायत की नई कड़ी में रूहानी लड़ाई और बौद्धिक विरासत का अनोखा संगम।
Hindi

५ साल से नमाज़ नहीं, परिवार को धोखा, दुआ में गंदे ख़याल — एक शख़्स का दर्द और ८०० साल पुरानी गूढ़ किताब का रहस्य · Avonetics

🎧 Listen to this episode
Closes with the original song “रूह का पहरा”. · Plays on Spotify · Open on Spotify ↗
Sponsored—As an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. The Ordinary Niacinamide 10% + Zinc Niacinamide 10% + Zinc 1% visibly improves skin radiance and smooths texture in one week.. HYDRATING FORMULA: Lightweight water-based serum that reinforces the skin barrier and pro… See it →

अस्सलामु अलैकुम। मैं आज वह कह रहा हूँ जो बरसों से कह न सका।

पाँच साल हो गए नमाज़ पढ़े। मेरा परिवार — अम्मी, अब्बू, बीवी, बच्चे — सब समझते हैं कि मैं वक्त का पाबंद हूँ। सुबह फ़ज्र की अज़ान पर उठने का नाटक करता हूँ, बाथरूम में पानी बहाकर वज़ू का दिखावा करता हूँ, फिर चुपचाप कमरे में बैठा रहता हूँ। हर झूठ के साथ दिल पर एक और पत्थर रख देता हूँ।

Read nextपेड़ों की सीक्रेट बातचीत या फंगस का खूनी खेल? जंगल के 'इंटरनेट' पर मचा भारी बवाल!

सबसे बुरा वह लम्हा होता है जब दुआ के लिए हाथ उठाता हूँ। अल्लाह से माफ़ी माँगना चाहता हूँ, मगर ज़हन में ऐसे ख़याल आते हैं जिनका जिक्र तक नहीं कर सकता। नफ़रत, गुस्सा, बेहूदगी — सब अल्लाह के लिए, रसूल के लिए, क़ुरआन के लिए। मैं चीख़कर इन्हें रोकना चाहता हूँ, मगर ये लहरों की तरह आते हैं। पसीने छूट जाते हैं। दुआ अधूरी रह जाती है।

किसी ने कहा: 'बस एक नमाज़ पकड़ो। मस्जिद में। फिर देखो।' किसी ने कहा: 'यह वसवसे शैतान के हैं, परवाह मत करो।' किसी ने कहा: 'यह ओसीडी है, डॉक्टर के पास जाओ।'

मैं किसकी सुनूँ?

---

दूसरी दुनिया: 'शम्स अल-मआरिफ़ अल-कुबरा'। १३वीं सदी का वह ग्रंथ जिसे अहमद अल-बूनी ने लिखा — या शायद उनके शागिर्दों ने उनके नाम से संकलित किया। हुरूफ़ (अक्षर), अदाद (संख्या), और आफ़ाक़-ओ-अनफ़ुस (ब्रह्मांड और आत्मा) के रिश्ते खोलने का दावा करती यह किताब तसव्वुफ़, कीमिया, और तिलस्मात की सरहदों पर खड़ी है।

विद्वानों का एक धड़ा कहता है: यह विशुद्ध सूफ़ी इल्म है, रूहानी तरक़्क़ी का नक्शा। दूसरा कहता है: इसमें जादुई अमलियात हैं जो शरई हदें पार करती हैं। पांडुलिपियाँ इस्तांबुल, काहिरा, बर्लिन, लंदन की लाइब्रेरियों में बिखरी हैं — कोई पूरी, कोई अधूरी, सबमें फ़र्क़।

Sponsored—As an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. EltaMD UV Clear Face Sunscreen This lightweight face sunscreen with transparent Zinc Oxide provides broad spectrum SPF 46 protection and helps protect normal and sensitive skin types from UVA and UVB damage with… See it →

आज भी नौजवान पीढ़ी इंटरनेट पर इसके 'वज़ीफ़े' ढूँढ़ती है, बगैर जाने कि असली मक़सद क्या था।

---

दो रास्ते, एक मक़सद: रूह को सुकून।

रवायत के मेज़बान इसी दोराहे पर खड़े होकर पूछते हैं: क्या अल्लाह उस बंदे को माफ़ करेगा जो बरसों से झूठ जी रहा है, मगर अब भी हाथ उठाए खड़ा है?

जवाब के लिए सुनिए पूरी कड़ी — रवायत पर।

Sponsored—As an Amazon Associate, Avonetics earns from qualifying purchases. Gillette Venus Sensitive Women's Disposable Razors 3 blades and a SkinElixir lubrastrip for glide, to deliver a smooth shave, with up to 0% irritation (US Consumer Study Feb 2018). Moisture Rich Strip with more lubricants for a gre… See it →
Sponsored
Vo Atlas Quick one from Vo Atlas. If you have ever picked a bank because it was the one your parents used, or kept a card because cancelling felt like admitting something — that is most people. Vo Atlas lays the options out side by side so choosing takes ten minutes instead of ten months of meaning to. voatlas.com. voatlas.com →
0:00
0:00
Link copied ✓
↑