4 लाख में खरीदी चमचमाती कार, आधी रात हाईवे पर फेल हुए ब्रेक: मैकेनिक के फर्जीवाड़े का हुआ सनसनीखेज पर्दाफाश!

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पहाड़ों की ठंडी हवा और गूंजते संगीत के बीच चार दोस्त अपनी पहली बड़ी रोड ट्रिप का आनंद ले रहे थे। गाड़ी 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हाईवे पर दौड़ रही थी, तभी अचानक स्टीयरिंग कांपने लगा और ब्रेक पैडल पूरी तरह से जमीन से जा सटा। कार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए धीरे-धीरे हैंडब्रेक खींचा और गाड़ी सड़क के किनारे एक खंभे से टकराते-टकराते बची। जब बोनट से उबलता हुआ धुआं बाहर निकला, तब जाकर उस भयानक सच्चाई का अहसास हुआ जो उनके साथ कुछ घंटे पहले हुई थी।
यह कहानी सिर्फ एक ड्राइवर की नहीं है, बल्कि देश के लाखों उन ड्राइवरों की है जो अपनी मेहनत की कमाई से सेकंड-हैंड कार खरीदते हैं और फिर फर्जी मैकेनिकों के जाल में फंस जाते हैं। पीड़ित ड्राइवर ने महज दो हफ्ते पहले ही 3.5 लाख रुपये में एक इस्तेमाल की हुई कार खरीदी थी। विक्रेता ने दावा किया था कि गाड़ी किसी डॉक्टर की है और बहुत कम चली है। रोड ट्रिप पर निकलने से ठीक एक दिन पहले, गाड़ी को एक स्थानीय गैरेज में नियमित सर्विस के लिए ले जाया गया।
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लेकिन जब हाईवे पर हादसा होते-होते बचा और दूसरी टोइंग सर्विस वाले मैकेनिक ने कार की जांच की, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। गाड़ी का ओरिजिनल ब्रेक ऑयल निकालकर उसमें मिलावटी पुराना तेल डाल दिया गया था। यही नहीं, कार के इंजन में कूलेंट का ढक्कन जानबूझकर ढीला छोड़ा गया था ताकि गाड़ी ओवरहीट हो और मालिक घबराकर दोबारा भारी-भरकम रिपेयरिंग के लिए उनके पास आए। जांच में यह भी सामने आया कि गाड़ी का ओडोमीटर 1,00000 किलोमीटर कम करके दिखाया गया था।
इस घटना ने इंटरनेट पर ऑटोमोबाइल प्रेमियों के बीच एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। एक इंटरनेट उपयोगकर्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्थानीय गैरेज वाले अक्सर कार के महंगे कैटेलिटिक कनवर्टर और ओरिजिनल सेंसर निकालकर सस्ते डुप्लिकेट पार्ट्स लगा देते हैं, जिससे आम ड्राइवर अनजान रहता है। दूसरी ओर, एक अन्य कार प्रेमी ने तर्क दिया कि सभी लोकल मैकेनिक बुरे नहीं होते, लेकिन खरीदारों को खुद थोड़ा तकनीकी ज्ञान रखना चाहिए ताकि कोई उन्हें बेवकूफ न बना सके।
The Giver
The Giver: A Story About Conformity, Control, and Society (Giver Quartet, 1): 9780544336261: Lowry, Lois: Books
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अधिकृत सर्विस सेंटरों की महंगी फीस बनाम लोकल गैरेज का जोखिम—यह एक ऐसा यक्ष प्रश्न है जो हर कार मालिक के सामने खड़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेकंड-हैंड कार खरीदने से पहले थर्ड-पार्टी OBD डायग्नोस्टिक स्कैनर से जांच कराना और सर्विस हिस्ट्री देखना बेहद जरूरी है। वरना एक छोटी सी लापरवाही आपकी रोड ट्रिप को आखिरी सफर बना सकती है।
इस खौफनाक रोड ट्रिप ड्रामे और फर्जी मैकेनिकों के काले सच पर हमारे शो के होस्ट्स ने की है तीखी और मसालेदार चर्चा, सुनिए पूरा एपिसोड!