दोस्त के बेटे ने की घर में चोरी, टोकने पर मिली ब्लैकमेलिंग: क्या अपनी हदें तय करना गलत है?

एक पारिवारिक पार्टी में कीमती सामान गायब होने और दोस्त के गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने खड़े किए दोस्ती और पेरेंटिंग पर गंभीर सवाल।
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दोस्त के बेटे ने की घर में चोरी, टोकने पर मिली ब्लैकमेलिंग: क्या अपनी हदें तय करना गलत है? · Avonetics

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दोस्ती में भरोसा और सम्मान सबसे बुनियादी बातें होती हैं, लेकिन जब वही दोस्ती आपके घर की सुरक्षा और शांति पर भारी पड़ने लगे, तो रिश्ते में दरार आना तय है। एक दिलचस्प पारिवारिक मामले में, एक पति-पत्नी ने अपने पुराने स्कूल के दोस्त और उसके ऑटिस्टिक बेटे के साथ अपनी सीमाओं को लेकर एक कठिन फैसला लिया है।

यह कहानी तब शुरू हुई जब इस जोड़े ने अपने बच्चों की हर जन्मदिन की पार्टी में अपनी पुरानी सहेली और उसके ऑटिस्टिक बेटे को शामिल करना शुरू किया। उनका इरादा सिर्फ इतना था कि वह मां और बच्चा खुद को अलग-थलग न समझें। लेकिन धीरे-धीरे यह सहृदयता एक सिरदर्द बन गई। पार्टी के दौरान दोस्त का बेटा घर के कमरों में अकेला घूमता और खिलौने या कीमती सामान अपनी जेब में भरने लगता।

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हाल ही में 14वें जन्मदिन की पार्टी में हद तब हो गई, जब वही बच्चा दूसरी बार मेजबान के महंगे गेमिंग डाइस (पासे) चुराते हुए पकड़ा गया। जब बच्चे की जेब से सामान निकला, तो उसकी मां ने माफी मांगने के बजाय बहुत ही ठंडे अंदाज में कहा कि "हम दूसरों का सामान नहीं लेते" और बिना किसी पछतावे के चली गई।

परेशान होकर जब दंपति ने अपनी दोस्त से साफ शब्दों में कहा कि वह पार्टी में जरूर आए लेकिन अपने बेटे पर खुद नजर रखे, तो दोस्त भड़क गई। उसने न केवल अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार किया, बल्कि अपनी बड़ी बेटी के जरिए दंपति की छोटी बेटी को ब्लैकमेल करवाना शुरू कर दिया कि "तुम्हारे मां-बाप के फैसले की वजह से हमारी दोस्ती टूट जाएगी।"

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इस मामले पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गई हैं। एक तरफ अधिकतर लोगों का मानना है कि ऑटिज्म की आड़ में बच्चों की चोरी और मां की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एक टिप्पणीकार ने कहा कि जब मां अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही और बच्चों को मोहरा बनाकर ब्लैकमेल कर रही है, तो ऐसी विषैली दोस्ती को तुरंत खत्म कर देना ही अकलमंदी है।

वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोगों का मानना है कि स्पेशल नीड्स वाले बच्चों की परवरिश करना बेहद थका देने वाला काम होता है। एक अन्य व्यक्ति ने तर्क दिया कि दोस्त शायद थकावट के कारण पार्टियों को थोड़ा ब्रेक मानती थी, इसलिए उस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बजाय थोड़ी और सहानुभूति से बात की जानी चाहिए थी।

इस कड़वे पारिवारिक ड्रामे, ब्लैकमेलिंग की सच्चाई और हमारी एंकर्स के कड़े फैसले के बारे में और गहराई से जानने के लिए, 'दिल का मामला' पॉडकास्ट का यह खास एपिसोड जरूर सुनें।

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