ढाई लाख डॉलर दिए और मिली सिर्फ़ चुप्पी: क्या टेस्ला की सुपरकार सिर्फ़ एक बड़ा छलावा थी?

सात साल का लंबा इंतज़ार और अब कंपनी का टका सा जवाब कि डिलीवरी की कोई गारंटी नहीं, जबकि एक अकेले कोडर ने पुराने लैपटॉप में जान फूंक दी।
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ढाई लाख डॉलर दिए और मिली सिर्फ़ चुप्पी: क्या टेस्ला की सुपरकार सिर्फ़ एक बड़ा छलावा थी? · Avonetics

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सिलिकॉन वैली के सबसे बड़े शोमैन ने जब 2017 में एक लाल रंग की चमचमाती स्पोर्ट्स कार का पर्दा उठाया था, तब हज़ारों अमीर खरीदारों ने पलक झपकते ही अपनी तिजोरियाँ खोल दी थीं। वादा था दुनिया की सबसे तेज़, रॉकेट तकनीक से लैस इलेक्ट्रिक सुपरकार का। कीमत थी पूरी ढाई लाख डॉलर यानी करीब दो करोड़ रुपये एडवांस।

आज सात साल बीत चुके हैं, लेकिन वो कार सड़कों पर उतरना तो दूर, अब उसके अस्तित्व पर ही गहरा ग्रहण लग चुका है। अंदरूनी सूत्रों से आ रही ख़बरों के मुताबिक, कंपनी ने साफ़ कह दिया है कि जिन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई जमा कराई थी, उन्हें कार कभी मिल भी पाएगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

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इस बयान के सामने आते ही तकनीकी हलकों में भूचाल आ गया है। एक विश्लेषक ने तंज कसते हुए कहा कि यह तकनीक की दुनिया का सबसे बड़ा बिना ब्याज़ का कर्ज़ था, जिसे प्रशंसकों ने ख़ुशी-ख़ुशी अपने चहेते अरबपति को दान कर दिया। किसी दूसरे जानकार का कहना है कि अगर यही पैसा शेयर बाज़ार में लगा होता तो आज चार गुना हो चुका होता, लेकिन खरीदारों को मिली तो सिर्फ़ तारीख़ पर तारीख़।

लोग अब पूछ रहे हैं कि क्या यह सब महज़ एक पब्लिसिटी स्टंट था? कुछ लोगों को तो यह भी संदेह है कि सात साल पहले जो प्रोटोटाइप दिखाया गया था, वह एक रिमोट कंट्रोल खिलौने से ज़्यादा कुछ नहीं था। इतिहास गवाह है कि इसी कंपनी ने सालों पहले फ़ुल सेल्फ़-ड्राइविंग के नाम पर भारी रकम वसूली थी, जो आज तक मुकम्मल नहीं हो पाई।

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लेकिन इस कॉर्पोरेट ड्रामे के ठीक उलट, ओपन-सोर्स की दुनिया से एक ऐसी ख़बर आई है जिसने बड़ी टेक कंपनियों के मुँह पर तमाचा जड़ दिया है। इंटरनेट पर एक अनजान डेवलपर ने gbos-x86 नाम का एक ऐसा टूल तैयार किया है, जो पुराने, बेकार पड़े इंटेल लैपटॉप्स में नई ज़िंदगी भर देता है।

जहाँ खरबों डॉलर की कंपनियाँ सिर्फ़ बड़े-बड़े वादे बेच रही हैं, वहीं यह साधारण कोडर पुराने हार्डवेयर पर आधुनिक गूगलबुक ओएस को बिना किसी रुकावट के दौड़ा रहा है। तकनीक के दीवाने अब कह रहे हैं कि असली क्रांति आलीशान शोरूम्स में नहीं, बल्कि ऐसे उत्साही कोडिंग प्रोजेक्ट्स में पनप रही है।

क्या टेस्ला के खिलाफ़ अब तक का सबसे बड़ा क्लास-एक्शन मुक़दमा शुरू होने वाला है? और क्या पुराने गैजेट्स को ज़िंदा करने वाले ओपन-सोर्स हैकर्स ही भविष्य की असली उम्मीद हैं? हमारे होस्ट्स इसी गरमा-गरम मुद्दे की तह तक पहुँच रहे हैं आज के पॉडकास्ट में।

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