आधी रात की दस्तक और खाली हाथ: जब दिल ईश्वर से पूछता है 'क्यों?'

आधी रात की दस्तक और खाली हाथ: जब दिल ईश्वर से पूछता है 'क्यों?' · Avonetics
रात के सन्नाटे में जब दुनिया सो जाती है, तब इंसानी दिल अपने सबसे गहरे और अनकहे सवालों के साथ अकेला रह जाता है। यह वह समय होता है जब दिन के शोर-शराबे की ओट खत्म हो जाती है और मन की खाली झोली साफ नज़र आने लगती है। सुसमाचार में ईसा मसीह एक मार्मिक दृश्य खींचते हैं—एक व्यक्ति आधी रात को अपने दोस्त के दरवाज़े पर दस्तक देता है। वह रोटी मांगता है, क्योंकि सफर से थके किसी मेहमान के लिए उसके पास कुछ भी नहीं बचा। वह विलासिता नहीं, केवल जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता की याचना कर रहा है। हम भी अपने जीवन में कई बार इसी तरह स्वर्ग के द्वार पर खड़े होते हैं। जब कोई गहरा आघात हमारे जीवन को बदल देता है, जब घर का कोना-कोना किसी प्रियजन की याद से भर जाता है, तब शब्द कम पड़ जाते हैं। हमारे पास प्रभु को देने के लिए केवल आंसू और खाली हाथ होते हैं। एक टिप्पणीकार ने कहा कि जब जीवन में कुछ समझ न आए, तब भी ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना ही सबसे बड़ी जीत है। वहीं दूसरे ने यह सच्चाई बयां की कि इंसान का दिल स्वाभाविक रूप से सवाल करता है और अपने दर्द का कारण जानना चाहता है। पवित्र शास्त्र हमें सिखाता है कि प्रभु के सामने अपनी पीड़ा को ईमानदारी से रखना कोई अपराध नहीं है। संत अय्यूब ने भी पूछा था, और दाऊद के भजनों में भी यही पुकार गूंजती है। इतिहास के पन्नों में सन 40 ईस्वी की वह घटना भी यही याद दिलाती है, जब संत जेम्स निराशा की स्थिति में एब्रो नदी के किनारे बैठे थे। उस वक्त माता मरियम ने प्रकट होकर उन्हें सहारा दिया, जिन्हें आज स्पेन और दुनिया भर में 'अवर लेडी ऑफ द पिलर' के रूप में पूजा जाता है। वह खंभा अटूट विश्वास का प्रतीक बन गया। हमारी यह यात्रा अकेलेपन की नहीं है। जो युवा आत्माएं ईश्वर के करीब चली गई हैं, वे स्वर्ग में प्रभु की संगति में चलती हैं और हमारे दिलों को अपनी सौम्य मुस्कान से बांधे रखती हैं। पोडकास्ट के इस विशेष अंक में दोनों प्रस्तुतकर्ता इसी गहरी सांत्वना और आंसुओं के बीच छिपी ईश्वरीय शांति पर रोशनी डालते हैं।