रसोईघर बनेल विस्फोटक कारखाना: रेडिट यूजरक नाइट्रोसेल्युलोज प्रयोग गेल गलत, पुलिस आ वैज्ञानिक दंग

रसोईघर बनेल विस्फोटक कारखाना: रेडिट यूजरक नाइट्रोसेल्युलोज प्रयोग गेल गलत, पुलिस आ वैज्ञानिक दंग · Avonetics
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पटना। एगो सामान्य दिखैत रेडिट पोस्ट देखते-देखते विज्ञान जगत म तूफान ले आइल। the internet समुदाय म u/AmateurAlchemist99 नामक यूजर अपनो भयावह अनुभव साझा कएल: ऊ अपनो अपार्टमेन्टक रसोईघर म नाइट्रोसेल्युलोज, जे गन कॉटन क नाम स प्रसिद्ध अछि, बनावत रहल, तभी एगो जोरदार विस्फोट भएल।
ऊ लिखल, "मैथिली म कहब त: हम सोचल रहल कि हम वैज्ञानिक बनेल छी, लेकिन हम बम बनाइ देल।" घटना म ऊ मामूली रूप स जल गेल आ खिड़कीक शीशा टूट गेल। पडोसीक शिकायत पर पुलिस आगबुझाव दल संग आ गेल।
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फोरेंसिक जांचक बाद पुष्टि भएल कि पदार्थ म १३.२% नाइट्रोजन रहल, जे योक उच्च विस्फोटक श्रेणी म रखैत अछि। विशेषज्ञ बतएल कि दुई मुख्य गलती भएल: पहिल, अभिक्रियाक दौराने तापमान नियंत्रण न करल (आइस बाथ नइ उपयोग कएल), आ दूसर, उत्पादक उदासीन न करल (बाइकार्बोनेट धुलाई क चूक)। अवशिष्ट अम्ल धीरे-धीरे अपघटन करैत ऊष्मा उत्पन्न कएल आ स्वतः प्रज्वलन हो गेल।
रेडिट पर प्रतिक्रिया विभाजित रहल। एगो टिप्पणीकार कहल, "यो विज्ञान नइ, मूर्खता अछि।" दूसरक मत रहल, "गलती स सीखे खातिर एह सार्वजनिक स्वीकारोक्ति साहसक कार्य अछि।" कइयो वरिष्ठ रसायनशास्त्री तकनीकी सुझाव दएल, जइसे: सल्फ्यूरिक अम्लक सांद्रता नियंत्रण, मिश्रणक दक्षता, आ आपातकालीन बुझावक योजना।
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डॉ. राधा कुमारी, एल.एन.एम.यू.क विभागाध्यक्ष, कहल, "जिज्ञासा सराहनीय अछि, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉलक उल्लंघन अक्षम्य।" फोरेंसिक वैज्ञानिक अनिल झा बतएल कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम क अन्तर्गत यो दंडनीय अछि, लेकिन कम मात्रा क कारण चेतावनी देक छोड़ दएल गेल।
यो घटना एगो बुनियादी प्रश्न उठावल: कइसे अनलाइन प्लेटफॉर्म वैज्ञानिक उत्साह क पोषण करैत खतरा रोकै सकैत अछि? हमार पॉडकास्ट "रसायनिक बम"क होस्ट एह कहानीक गहराई म विश्लेषण करैत छी, जे श्रोता नइ भूला सकैत।