प्रेग्नेंसी में सेक्स नहीं किया तो क्या नॉर्मल डिलीवरी में होगा भयंकर दर्द? जानिए सच

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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, लेकिन कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिन्हें पूछने में अक्सर महिलाएं हिचकिचाती हैं। ऐसा ही एक बड़ा सवाल इन दिनों चर्चा में है: क्या पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक संबंध (sex) न बनाने से डिलीवरी के समय दर्द ज्यादा होता है? 28 हफ्ते की एक गर्भवती महिला ने अपनी चिंता साझा करते हुए बताया कि अत्यधिक संवेदनशीलता और पेल्विक फ्लोर की जकड़न के कारण वे और उनके पति संबंध नहीं बना पा रहे हैं। उनके दिमाग में सबसे बड़ा डर यह है कि अगर अभी वहां थोड़ी सी भी जगह नहीं बन पा रही है, तो बच्चा बाहर कैसे आएगा?
इस विषय पर अनुभवी माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अलग-अलग अनुभव सामने आए हैं। अधिकांश माताओं का मानना है कि प्रेग्नेंसी में संबंध न बनाने का डिलीवरी के दर्द या जटिलता से कोई सीधा संबंध नहीं है। एक महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे भी पूरी प्रेग्नेंसी इसी डर से गुजर रही थीं, लेकिन जब डिलीवरी का समय आया तो उन्होंने महज 2.5 पुश में बच्चे को जन्म दे दिया। वहीं एक अन्य महिला ने बताया कि उन्होंने प्रेग्नेंसी के 6 महीने बाद से संबंध नहीं बनाए थे और उन्होंने 9 पाउंड से ज्यादा वजन के बच्चे को बिना किसी चीरे या टीयर के आसानी से जन्म दिया।
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विशेषज्ञों का कहना है कि डिलीवरी के समय महिला का शरीर पूरी तरह से अलग हार्मोनल स्थिति में होता है। रिलैक्सिन नामक हार्मोन जोड़ों और मांसपेशियों को लचीला बनाता है, जिससे बच्चा आसानी से बाहर आ सके। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान पेल्विक फ्लोर की जकड़न का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि डिलीवरी में समस्या आएगी।
हालांकि, एक दूसरा पहलू यह भी है कि पेल्विक फ्लोर की जकड़न को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। एक अन्य महिला ने सुझाव दिया कि यदि गर्भावस्था में दर्द या अत्यधिक असहजता महसूस हो रही हो, तो पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपिस्ट से मिलना बेहद फायदेमंद हो सकता है। पेल्विक थेरेपी और सही सांस लेने के अभ्यास से न केवल गर्भावस्था का दर्द कम होता है, बल्कि डिलीवरी के समय पुश करना भी आसान हो जाता है। डॉक्टरों द्वारा 36वें हफ्ते के बाद पेरीनेअल मसाज (perineal massage) की सलाह भी दी जाती है ताकि डिलीवरी के समय फटने (tearing) का जोखिम कम से कम हो।
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कहानी का एक और दिलचस्प पहलू उम्र के साथ बदलने वाले प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं। 37 साल की उम्र में दोबारा प्रेग्नेंट हुई एक महिला ने बताया कि 22 साल की उम्र में उनकी पहली प्रेग्नेंसी बहुत आसान थी और कोई लक्षण नहीं थे। लेकिन 37 की उम्र में उन्हें भयंकर ब्रेस्ट पेन, लगातार जी मिचलाना और भारी ब्लोटिंग का सामना करना पड़ रहा है। इससे साफ है कि हर उम्र और हर प्रेग्नेंसी का अनुभव बिल्कुल अलग होता है।
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