कावाक नशा, क्रेटमक जाल आ $4,547 केर बायोहैकिंग तमाशा: देसी नुस्खा सँ तबाह भेल जिंदगी!

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एंग्जायटी आ डिप्रेशन सँ त्राण पयबाक लेल जखन एक युवक डॉक्टरक प्रेगाबालिन छोड़ि कऽ कावाक शरण में गेलाह, तखन हुनका अंदेशा नहि छलन्हि जे ई देसी नुस्खा हुनका नरकक द्वार पर पहुंचा देत। नित्य 50 ग्राम कावाक भारी मात्रा पीबाक बाद जखन अचानक दोकान बंद भेलाक कारण कावा खतम भेल, तखन हुनकर शरीर थरथरा उठलन्हि। तीव्र कंपकंपी, अनिद्रा, पसीना आ भयानक अवसादक एहन दौरा पड़लन्हि जे ओ बिस्तर सँ उठबाक स्थिति में नहि रहलाह।
अपन स्थिति सँ घबरा कऽ ओ 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन आ संगहि 15 ग्राम क्रेटम सेहो फांकय लगलाह, मुदा शरीरक बेचैनी टस सँ मस नहि भेल। इंटरनेट पर लोक सभ कहैत छलाह जे कावा सँ कोनो विड्रॉल नहि होइत अछि, मुदा एहि मरीजक हालत देखि कऽ ई दावा पूरी तरह भरभरा कऽ खसि पड़ल अछि।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभक बीच एहि घटना केँ लऽ कऽ दू टा स्पष्ट फांक भऽ गेल अछि। एक टिप्पणीकार तर्क देलथि जे पूरा दिन में 50 ग्राम कावाक सेवन मस्तिष्कक तंत्रिका तंत्र कऽ एकर गुलाम बना देलक। हुनकर कहब छल जे प्रेगाबालिनक कटौती आ कावाक अचानक बंद हेबा सँ शरीरक गाबा रिसेप्टर्स ध्वस्त भऽ गेलाह, तें तुरंत कावा लऽ कऽ शरीर कऽ स्थिर कयल जाय आ फेर धीरे-धीरे मात्रा कम कयल जाय।
दोसर टिप्पणीकार एकर विरोध करैत तर्क देलथि जे असली गुनहगार क्रेटम आ प्रेगाबालिनक छेड़छाड़ अछि। हुनका अनुसार फेर सँ कावा कीनि कऽ पीबब लतक दायरा कऽ आओर बढ़ाबब हेत। रोगी कऽ तुरंत सब जड़ी-बूटी बंद कऽ कऽ डॉक्टरक निगरानी में जायक चाही।
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मुदा ई भ्रम केवल पारंपरिक जड़ी-बूटी धरि सीमित नहि अछि, आधुनिक बायोहैकिंग सेहो एहिना लूट मचौने अछि। एक खोजी उपभोक्ता नौ मास में $4,547 खर्च कऽ पेटक आरएनए माइक्रोबायोम टेस्ट करौलनि। सैकड़ों टेस्ट आ नियमित खून जांचक बाद कंपनी अचानक हुनकर सप्लीमेंट फॉर्मूलाक 80 प्रतिशत हिस्सा बदलि देलक।
जखन उपभोक्ता सवाल उठेलनि जे पुरान सप्लीमेंट असरदार छल कि नहि, एकर कोनो सबूत कंपनी लग नहि छल। प्राकृतिक उपचारक नाम पर जड़ी-बूटीक दलदल हो या उच्च तकनीकक नाम पर सप्लीमेंटक व्यापार, आम जनता स्वास्थ्यक नाम पर ठगल जा रहल अछि।
आरोग्य तरंग पोडकास्टक ताजा अंक में मिथिलेश आ कल्याणी एहि दुनू रहस्यमयी मामलाक परत-दर-परत पोल खोलि रहल छथि।