180 हार्ट रेट और धीमी रफ़्तार: क्या स्मार्टवॉच आपके रनिंग पैशन को मार रही है?

मैराथन के बाद वजन बढ़ना, घुटने की रहस्यमयी आवाज और हाई हार्ट रेट के बीच एथलीट्स का बड़ा खुलासा।
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180 हार्ट रेट और धीमी रफ़्तार: क्या स्मार्टवॉच आपके रनिंग पैशन को मार रही है? · Avonetics

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रनिंग की दुनिया में इन दिनों एक अजीब बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ जहाँ फिटनेस ट्रैकर और स्मार्टवॉच हर कदम पर आपकी हार्ट रेट का हिसाब रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सालों से दौड़ रहे अनुभवी एथलीट खुद को असफल महसूस कर रहे हैं। एक 38 वर्षीय महिला धावक ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे हाई स्कूल के दिनों से दौड़ रही हैं, लेकिन उनका पेस आज भी 11:30 मिनट प्रति मील से ज्यादा नहीं बढ़ पाया है। जब भी वे ट्रैक पर उतरती हैं, उनका दिल 180 से 190 बीट प्रति मिनट की रफ़्तार से धड़कने लगता है।

इस स्थिति ने धावकों के बीच दो कड़े गुट बना दिए हैं। कई लोगों का मानना है कि जब आपकी हार्ट रेट इतनी ऊंची हो जाती है, तो शरीर पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। एक विश्लेषक ने कहा कि अगर आपकी पेस 12:00 मिनट प्रति मील भी गिर जाती है, तब भी आपको अपनी गति धीमी करनी चाहिए ताकि ज़ोन 2 ट्रेनिंग का लाभ मिल सके। उनका मानना है कि वॉच के डेटा को नजरअंदाज करना कार्डियक हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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हालांकि, हर कोई इस बात से सहमत नहीं है। फिटनेस समुदाय के एक बड़े वर्ग का तर्क है कि हर इंसान की बायोलॉजिकल बनावट अलग होती है। एक अन्य प्रतियोगी ने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति बिना किसी सीने के दर्द या चक्कर के 180 हार्ट रेट पर कम्फर्टेबल महसूस करता है, तो उसे केवल डिजिटल आंकड़ों के डर से दौड़ना बंद नहीं करना चाहिए। स्मार्टवॉच कई बार सही डेटा नहीं देतीं और वे धावकों के दिमाग में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं।

इसी बहस के बीच एक और मुद्दा गरमाया हुआ है—एक साल के ब्रेक के बाद 30 पाउंड वजन बढ़ना और फिर से मैराथन की तैयारी करना। कई धावक ब्रेक के बाद जब वापसी करते हैं, तो उनके घुटनों से 'क्लिक' की आवाज आने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दर्द न भी हो, तो भी यह आवाज इस बात का संकेत है कि आपके जोड़ों को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पाइलेट्स की सख्त जरूरत है।

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केवल मैराथन ही नहीं, बल्कि हाल ही में संपन्न हुए क्रायो नाइट रन जैसे कठिन सहनशक्ति आयोजनों में भी यह देखा गया है कि जो टीम संयम और सही पेसिंग के साथ उतरी, उसने ही जीत दर्ज की। क्रायो रेस के विजेताओं का कहना है कि तीन बार असफल होने के बाद जब उन्होंने सही रणनीति अपनाई, तभी वे जीत हासिल कर सके।

पेसमेकर पॉडकास्ट के आज के नए एपिसोड में हमारे होस्ट्स इसी मुद्दे पर आमने-सामने होंगे और तय करेंगे कि क्या आपको वॉच डेटा मानना चाहिए या अपने शरीर की सुननी चाहिए।

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