10 मिनट में टूटे दो टुकड़े: जब अटलांटिक में जर्मन सबमरीन ने अमेरिकी युद्धपोत USS Fiske को बनाया शिकार

2 अगस्त 1944 को नाज़ी U-804 के एक घातक टॉरपीडो हमले ने अमेरिकी नौसेना के सबमरीन-हंटर युद्धपोत के परखचे उड़ा दिए।
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2 अगस्त 1944 की दोपहर अटलांटिक महासागर में एक ऐसा भयानक दृश्य देखने को मिला, जिसने अमेरिकी नौसेना को हिलाकर रख दिया। एजोरेस द्वीपों के उत्तर में गश्त लगा रहा अमेरिकी विनाशक युद्धपोत USS Fiske (DE-143) एक गुप्त मिशन पर था। उसका लक्ष्य था जर्मन U-boats को ढूंढकर तबाह करना, जो नाज़ियों को मौसम की सटीक जानकारी भेज रही थीं।

गश्त के दौरान Fiske और उसके साथी युद्धपोत USS Douglas L. Howard ने समुद्र की सतह पर जर्मन सबमरीन U-804 को तैरते देखा। अमेरिकी जहाजों की आहट पाते ही सबमरीन तुरंत पानी के नीचे गायब हो गई। Fiske के क्रू ने बिना समय गंवाए सोनार चालू किया और सबमरीन की लोकेशन ट्रैक कर ली।

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इसके बाद जो हुआ, उसकी कल्पना शायद अमेरिकी सैनिकों ने नहीं की थी। Fiske तेजी से सबमरीन की ओर बढ़ा ताकि उस पर डेप्थ चार्ज गिरा सके। लेकिन U-804 के जर्मन कमांडर ने शिकारी को ही घेरने की योजना बना ली थी। जैसे ही Fiske सबमरीन के ऊपर से गुजरा, U-804 ने सीधा टॉरपीडो हमला कर दिया।

एक भीषण विस्फोट के साथ टॉरपीडो Fiske के बीचों-बीच जा लगा। धमाका इतना ज़बरदस्त था कि महज़ 10 मिनट के भीतर 300 फीट लंबा लोहे का युद्धपोत बीच से टूटकर दो हिस्सों में बंट गया और समुद्र में समाने लगा। इस हादसे में 33 सैनिकों की तुरंत मौत हो गई और 50 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गए।

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इतिहासकारों और सैन्य विशेषज्ञों के बीच इस घटना को लेकर आज भी बहस होती है। एक टिप्पणीकार ने कहा कि Fiske का हमला करना पूरी तरह से वाजिब था क्योंकि मौसम की रिपोर्ट रोकने के लिए U-boat को मार गिराना ज़रूरी था। वहीं एक अन्य विश्लेषक का कहना था कि बिना सुरक्षा का ध्यान रखे सीधे सबमरीन के ऊपर से गुजरना कप्तानी की बड़ी भूल थी, जिसका फायदा जर्मन कमांडर ने उठाया।

इस दुखद घटना के तमाम ऐतिहासिक पहलुओं और युद्ध रणनीतियों की इस बहस पर हमारे शो के होस्ट्स क्या राय रखते हैं, जानिए इस एपिसोड में।

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