तापमान आ तनाव केर खौफनाक खेल: वैज्ञानिक अध्ययन मे खुलासा, गर्मी मे किऐक बढ़ैत अछि हिंसा आ आत्महत्या?

अमरीका मे भेल आठ सालक व्यापक डेटा विश्लेषण सँ सोझाँ आएल जे अत्यधिक गर्मी आ अनिद्रा इंसान मे आक्रामक प्रवृत्ति केँ भड़का रहल अछि।
Maithili

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गर्मी केर मौसम केवल पसीना आ चिपचिपाहट धरि सीमित नहि अछि, बल्कि ई मानव मस्तिष्क आ समाज लेल एकटा गंभीर चुनौती बनैत जा रहल अछि। हाल ही मे अमरीका मे भेल एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन मे ई बात सोझाँ आएल अछि जे गर्मी केर महिना मे मास शूटिंग आ आत्महत्या केर मामला मे अचानक भारी वृद्धि देखल जाइत अछि। सन २०१४ सँ २०२१ धरि केर डेटा केर गहन अध्ययन सँ ई स्पष्ट भेल अछि जे गर्मी केर चरम मौसम आ हिंसात्मक घटना सभ मे एकटा गहरा आ निरंतर संबंध अछि।

वैज्ञानिक शोधकर्ता सभक मानब अछि जे गर्मी केर कारण शरीर मे जैविक आ व्यवहारिक परिवर्तन आबैत अछि। अत्यधिक तापमान केर कारण इंसान केर हृदय गति बढ़ि जाइत अछि आ शारीरिक असुविधा केँ कारण दिमाग मे चिड़चिड़ापन आ आक्रामकता जन्म लैत अछि। एक विश्लेषक कहलनि जे गर्मी मे 'समर सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर' केर कारण लोक अनिद्रा केर शिकार भ' जाइत छथि। राति मे नीक सँ नींद नहि हेबाक कारण दिमाग केर आत्मनियंत्रण कमजोर भ' जाइत अछि आ लोक छिटपुट बात पर उग्र भ' जाइत छथि।

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मुदा सभ वैज्ञानिक एही तर्क सँ पूर्णतः सहमत नहि छथि। एक दोसर शोधकर्ता कहलनि जे गर्मी मे हिंसा बढ़बाक मुख्य कारण सामाजिक गतिविधियाँ अछि। गर्मी केर दिन मे लोक घर सँ बाहर निकलैत छथि, पार्क, रेस्टोरेंट आ सार्वजनिक स्थान पर भीड़ जमा होइत अछि। एहेन मे आपराधिक प्रवृत्ति केर लोक लेल शिकार खोजना आ भीड़ मे मिल जाना आसान भ' जाइत अछि। एहि सँ टकराव आ हिंसात्मक घटना केर अवसर बेसी बनि जाइत अछि।

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एही अध्ययन मे ई बातो सोझाँ आएल अछि जे मास शूटिंग करै वाला अधिकतर लोक पहिने सँ भारी मानसिक तनाव आ आत्महत्या केर सोच सँ जूझि रहल छथि। गर्मी केर बेहाल करै वाला मौसम एही अवसाद केँ आउ भयानक रूप दे दैत अछि। आर्थिक रूप सँ कमजोर इलाका मे गर्मी केर राति मे लोक सड़क पर बेसी समय बितावैत छथि, जाहि सँ आपसी बहस आ हिंसा केर मामला बेसी सोझाँ आबैत अछि।

कि मौसम आ तापमान सचहुँ इंसान केँ हिंसक बना सकैत अछि? एही खौफनाक आ विचारणीय विषय पर टेकटाक केर नवीनतम एपिसोड मे भारती आ उमाकांत विस्तार सँ चर्चा क' रहल छथि।

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