"हमरा अपन पुलिसक वर्दी सँ घृणा अछि": एक अधिकारीक छिपल दर्द आ डिप्रेशनक मार्मिक कहानी

"हमरा अपन पुलिसक वर्दी सँ घृणा अछि": एक अधिकारीक छिपल दर्द आ डिप्रेशनक मार्मिक कहानी · Avonetics
पुलिसक वर्दी पहिनब बहुतो लोकक लेल गर्वक बात होइत अछि, मुदा सबही लेल ई सपना सच नहि होइत। एक २४ वर्षीय युवक जखन क्रिमिनल जस्टिस मे डिग्री प्राप्त कऽ पुलिस बल मे शामिल भेल, तँ ओकरा लागल छल जे ओ अपन जीवनक सही राह पर अछि। मुदा दो सालक भीतर ओकर ई सपना एक डरावना दुस्वप्न मे बदलि गेल।
ओ अधिकारी स्वीकार करैत छथि जे ओ तनावपूर्ण आ हिंसक स्थिति सभ मे घबरा जाइत छथि। हुनकर हाथ कांपैत अछि आ बॉसक डांट ओकर आत्म-विश्वास केँ तोड़ि देने अछि। ओकरा आम लोक केँ बेवजह परेशान करब आ चालान काटबाक दबाव नीक नहि लगैत अछि।
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महकमा मे व्याप्त भ्रष्टाचार आ नीच सोच बला सहकर्मियों के कारण ओ डिप्रेशन मे आबि गेल छथि। अपन मानसिक स्थिति सँ ओ एतेक परेशान भऽ चुकल छथि जे छुट्टीक दिन लोक सँ भेटबा मे सेहो हुनका डर लगैत अछि।
हाल ही मे एक म्यूजिक फेस्टिवल मे जखन लोक हुनका सँ कामक बारे मे पूछलन्हि, तँ ओ अपन पहचान छुपाबैत 'फायरफाइटर' बजलाह। ओ स्वीकार करैत छथि जे हुनका अपन पुलिस होयबा पर शर्म आबैत अछि।
Your brand, right here.Reach story-obsessed listeners in 45+ languages → advertise on Avoneticsएहि कहानी पर विभिन्न लोक सभक अलग-अलग राय अछि। एक टिप्पणीकार कहलन्हि जे 'करियर बदलब कखनो देर नहि होइत, अपन मानसिक स्वास्थ्य लेल नौकरी छोड़ब असफलता नहि अछि।'
ओतही दोसर टिप्पणीकार तर्क देलन्हि जे 'हताशा मे नौकरी छोड़बाक बजाय विभागक भीतर दोसर विभाग (जैसे डिस्पैचर या जासूस) मे ट्रांसफर लेबाक प्रयास करबाक चाही।'
ई कहानी ई सवाल ठाढ़ करैत अछि जे की समाजक सुरक्षा करै बला लोक स्वयं सुरक्षित छथि? 'अपन डायरी' पॉडकास्ट मे कल्याणी आ उमाकांत एहि विषय पर गम्भीरता सँ चर्चा कऽ रहल छथि।