"अंधेरे कमरे से उड़ते ड्रोन तक": 15 साल के किशोर की दर्दनाक दास्तान और सांसों का संकट

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युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, यह उन छोटे-छोटे कमरों में भी लड़ा जाता है जहाँ आम इंसान अपनी साँसों को गिन रहा होता है। रूस के क्रास्नोडार शहर का एक 15 वर्षीय किशोर इन दिनों एक ऐसी ही जंग से गुजर रहा है। सात साल की उम्र से एक-कमरे के नम बेसमेंट में गरीबी का जीवन बिताते हुए, इस किशोर ने न केवल युद्ध के खौफ को देखा है, बल्कि अपनी पहचान छुपाने के दर्द को भी सहा है।
युद्ध की शुरुआत में सरकारी प्रचार के प्रभाव में आकर खुद को 'देशभक्त' मानने वाला यह बच्चा जैसे-जैसे बड़ा हुआ, सच उसके सामने आने लगा। वर्ष 2024 में जब उसे अपनी समलैंगिक पहचान का अहसास हुआ, तो उसे यह भी समझ आ गया कि जिस देश में वह रहता है, वहाँ उसका होना ही उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाने के लिए काफी है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और कड़े कानूनों के बीच इंटरनेट पर रूसियों के खिलाफ बढ़ती नफरत ने उसकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ दिया।
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हाल ही में एक भयानक रात को उसके घर के पास एक यूक्रेनी ड्रोन का धमाका हुआ। खिड़कियाँ टूट गईं, छत से धूल झड़ने लगी और देर से बजे आपातकालीन सायरन ने सरकार की लापरवाही की पोल खोल दी। इस घटना के बाद से उसका तनाव और एंग्ज़ायटी चरम पर पहुँच गई। एक अन्य घटना में, उसकी माँ जिस स्थान पर काम करती थी, उसके पास का गोदाम भी धमाके में उड़ गया।
मानसिक तनाव का यह बोझ जब असहनीय हो गया, तो शरीर ने भी जवाब देना शुरू कर दिया। अत्यधिक तनाव के बीच जिम में वर्कआउट के दौरान भारी मात्रा में कैफीन लेने से उसे एक खौफनाक पैनिक अटैक का सामना करना पड़ा। उसकी सांसें उखड़ने लगीं, हाथ-पैर सुन्न हो गए और वह लगभग आधे घंटे तक असहाय होकर रोता और हांफता रहा। घटना के 14 घंटे बीत जाने के बाद भी सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ बनी हुई है।
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इस दिल दहला देने वाली कहानी पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। एक टिप्पणीकार ने कहा, "इस उम्र में तुम्हारी सबसे बड़ी प्राथमिकता सिर्फ जीवित रहना और अपनी पहचान को सुरक्षित रखना होना चाहिए। सही समय आने पर तुम्हें यह माहौल छोड़ना होगा।"
वहीं एक अन्य व्यक्ति का मानना था, "15 साल की उम्र में गरीबी और पाबंदियों के बीच देश छोड़ना आसान नहीं है। दुनिया में हर तरफ फैला प्रोपेगैंडा आम लोगों के दर्द को नहीं समझता, लेकिन तुम्हें हार नहीं माननी चाहिए।"
सुकून पॉडकास्ट के इस एपिसोड में हमारे होस्ट्स इस गंभीर विषय और पैनिक अटैक के शारीरिक-मानसिक प्रभावों पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं।